[Kavita Seth & Kanishk Seth "Dard" के बोल]
[Intro]
दर्द क्या है मैं तुम्हें कैसे बताऊँ, ऐ दोस्त
दर्द क्या है मैं तुम्हें कैसे बताऊँ, ऐ दोस्त
[Verse 1]
दर्द एक शिद्दत-ए-एहसास की फ़रियाद सा है
सर्द रातों में वो भरती हुई एक याद सा है
दर्द आँसू भी है, धड़कन भी है, तूफ़ान भी है
ऐ ख़लिश एक बगूला है, रग-ए-जान भी है
दर्द क्या है मैं तुम्हें कैसे बताऊँ, ऐ दोस्त
[Verse 2]
जैसे एक दश्त में राहों का कहीं खो जाना
जैसे बचपन की निशानी का फ़ना हो जाना
ख़ुशनुमा ख़्वाब का आँखों से जुदा हो जाना
चाँदी का जवाहरातों से ख़फ़ा हो जाना
एक उम्मीद सी मरने भी नहीं जो देती
ना-उम्मीदी सी जो जीने भी नहीं देती कभी
दर्द क्या है मैं तुम्हें कैसे बताऊँ, ऐ दोस्त
[Verse 3]
दर्द मजनूँ की आहों में छिपा पाओगे
दर्द आशिक़ की निगाहों में निहाँ पाओगे
दर्द मुफ़लिस की जवानी पे घिरा पाओगे
दर्द शायर के ख़यालों में छिपा पाओगे
इसे महसूस करो, बस इसे महसूस करो
इसे महसूस करो, बस इसे महसूस करो
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