ओ सजना कैसे तू मुझको ठगे
तू ही है, मेरी सब यादो में
तू ही है, मेरे हर वादों में
जाने दे, हुई है ग़लती मुझसे
मानता हू में
क्या करू, तुझको मनाना ही तो चाहता हू में
फिर क्यू नज़रें चुरावे, मुझको सातवे
ओ सजना वे सुन सजना वे
ऐसे तू मुझको ठगे
ओ सजना वे सुन सजना वे
ऐसे तू मुझको ठगे ऐसे तू मुझको ठगे
चाँद है तू और, बाकी सितारे
फीके लगे तेरे आगे ये सारे
जब से मिली है तुझसे निगाहें
देखे बिना मुझसे रहा भी ना जाए
तू ही छुपा है ख़यालो में
तू ही किताबो सवालो में
चाहत है तेरा ही बनके में रहु
बिन तेरे एक दिन भी मुश्किल जीना
बिन तेरे जैसे
फिर क्यू नज़रें चुरावे, मुझको सातवे
ओ सजना वे सुन सजना वे
ऐसे तू मुझको ठगे
ओ सजना वे सुन सजना वे
ऐसे तू मुझको ठगे
ऐसे तू मुझको ठगे
ऐसे तू मुझको ठगे
ओ सजना वे सुन सजना वे ऐसे
ऐसे तू मुझको ठगे
ओ सजना वे सुन सजना वे
ऐसे तू मुझको ठगे
ऐसे तू मुझको ठगे
ऐसे तू मुझको ठगे
Lyrics provided by LRCLIB