सूरमाई आँखें तेरी
उठकर जो गिरी
बहती फ़िज़ा चलते नज़ारे सब रुक्क गये
तारों के मोंगरे
बरसे छत पे मेरे
जो बादलों के टोकरे हैं
झुकक गये
कैसी जादूगरी फूँकी तुमने है
हैं ना बोलो ना
कैसी जादूगरी फूँकी तुमने है
हैं ना बोलो ना
कभी कभी शाम जलती है
कभी कभी दिन बुझता है
कभी कभी बात बनती है
कभी कभी सब उलझता है
आसमान था पतंग
चाँदनी थी डोर
देखो लूट्ट गया है ये ओर तू है चोर
कैसी जादूगरी फूँकी तुमने है
सूरमाई आँखें तेरी
उठकर जो गिरी
बहती फ़िज़ा चलते नज़ारे सब रुक्क गये
तारों के मोंगरे
बरसे च्चत पे मेरे
जो बादलों के टोकरे हैं झुकक गये
कैसी जादूगरी फूँकी तुमने है
हैं ना बोलो ना
कैसी जादूगरी फूँकी तुमने है
हैं ना बोलो ना
कैसी जादूगरी फूँकी तुमने है
हैं ना बोलो ना
कैसी जादूगरी फूँकी तुमने है
हैं ना बोलो ना
Lyrics provided by LRCLIB